हर तूफान से निकल आने का जज्बा महिलाओं में
सरिता शर्मा/ मुजफ्फरपुर
महिलाओं में हर तूफान से निकल आने का जज्बा होता है, या यूँ कहें कि हर दरिया से बाहर निकल आने की क्षमता होती है! फिर ब्रेकअप कोई बडी़ चीज तो नहीं?

बात उन दिनों की है जब मैं अपनी बडी़ बहन के पास कर्नाटक (मार्च 2004-नवम्बर 2004) गई थी! बहन के पड़ोस में एक तमिल ब्राह्मण परिवार रहता था जिनकी इकलौती बेटी से मेरी पहचान कब गहरी दोस्ती में बदल गई पता ही नहीं चला! उसमें बहुत बचपना था और मुझे उसकी बचकानी बातें अच्छी लगती थी! लेकिन अगल-बगल के लोग उसकी इस मासूमियत और भोलेपन को पागलपन समझते थे! फिर एक दिन किसी ने मुझे बताया कि “आप जिस लड़की से दोस्ती की है न वो पागल है और उसका तलाक हो गया है”! ये सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा कि कैसे-कैसे लोग है जो एक पीड़िता के प्रति सहानुभूति की जगह ऐसी घिनौनी सोच रखते हैं!मैं जब उससे पूछी तो सच्चाई का पता चला! उस लड़की की शादी मात्र 16 साल की उम्र में 38 साल के लड़के से हुई थी! उसका एक बच्चा भी हुआ लेकिन गर्भ में ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी! इस घटना का जिम्मेदार उसका पति उसे मानकर तरह-तरह की यातनायें देता था और अंततः उनका तलाक हो गया !
प्यार में जब कोई चोट खाता है तो वह मानसिक एवं भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है!ऐसे में उसे एक ऐसे शख्स की जरूरत होती है जिससे वो अपने दिल की सारी बातें बता सके!उसकी आपबीती सुनकर मेरी आँखें भर आई !
8 महीने के प्रवास के दौरान ऐसा कोई दिन नहीं गुजरा जब हमदोनों की घंटो बातें नहीं होती! मैं उसे जिंदगी को नये सिरे से शुरू करने के लिए प्रैक्टिकली समझाती!धीरे-धीरे वो डिप्रेशन से बाहर निकल कर सामान्य जीवन जीने लगी!
नवंबर 2004 के बाद हमदोनों कभी नहीं मिलें पर फोन पे बातें होती रहती है! आज वह अपने पैरों पर खड़ी है और बंगलोर के एक बड़े अस्पताल में पिछले 5 सालों से नर्स है!
अगर हम किसी रिश्तें में सफल नहीं हुए तो इसका मतलब ये तो नहीं कि हम अपनी जिंदगी से हार जायें!! धन्यवाद!!!


