क्या शादी में मेहनत से कमाये धन का प्रदर्शन कुरीति नहीं?
Kiran Singh/Bihar
मैं ब्रह्मभट्टवर्ल्ड पर अपने स्वजाति सदस्यों से कहना चाहती हूँ कि क्या दहेज ही कुरीति है ? क्या शादी की एक रात में अपने मेहनत से कमाये धन का प्रदर्शन कुरीति नहीं है? हम मिलकर अपने बेटे और बेटियों का विवाह करें तब दहेज मुक्त विवाह हो सकता है?
हरिओम प्रासाद राय भट्ट इस विषय पर बहुत बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन दिल से दहेज को विरोध में कुछ लोग ही हिस्सा ले पाते हैं, और स्वीकार करते हैं कि यह कुरिती है, जो इसके भुक्तभोगी है वो तो सामने आते हैं, और जिनको लेना है वो लेते ही है, सवाल आप का अच्छा है, जबाब उन लोभियो को देनाKiran Singh आप औरहम जागरूक हों
Roy Tapan Bharati मैं पूरी तरह सहमत नहीं। समाज में कुछ परिवार ऐसे हैं जो दहेज नहीं मांगते हैं
Rakesh Sharma इस दलदल में लगभग सभी फंसे रहे हैं।आरोप प्रत्यारोप लगाने से कुछ हासिल नहीं होगा।हम सुधरेंगें जग सुधरेगा।श्री राम शर्मा आचार्य जी की उक्ति की खर्चिली शादियां हमें दरिद्र और बेईमान बनाती है बिल्कुल सही था।
Usha Sharma Pradarshan band ho jaye phir Dahej band ho jayega! Pradarshan se var and vadhu dono ka hee kharch hota hai!
Vidya Sharma दहेज नहीं माँगते ..पर शादी भी किसी गरीब परिवार मे नहीं करते…तब अपनी हैसियत या उससे जादा बडे परिवार मे रिश्ता करते है।
Rakesh Sharma गरीब की लडकी भले बहुत उच्च शिक्षित न हो परन्तु समझदार उच्च शिक्षितों से ज्यादे होती हैं।बसर्ते मुल शिक्षा हो।
Vidya Sharma उच्च शिक्षित होने के बाद भी ..यही होता है। सब कहने की बात है।
Ajaykumar Mishra लड़की के पिता अक्सर दहेज बिरोधी होता है और जब वही ब्यक्ति लड़के का पिता होता है तो सारा कसमे वादे भूल कर दहेज की मांग करने लगता है
Vinita Sharma लड़की वाले अगर सख्त हो जाये तो ये प्रथा बंद हो जाएगी ।प्रदर्शन अब status symbol हो गया है।
Kiran Singh Status to tabhi symbolised ho gya jab hamne apne bachon ko civilised nd statusful bana diya
Vinita Sharma Yes, Didi but no body understand and extravaganza in a marriage has become a status symbol
Vinita Sharma दीदी की बोर्ड पर उंगलियाँ घुमा कर बड़ी बड़ी बातें सब लिख देते हैं। यहाँ उसकी साड़ी से मेरी साड़ी सफेद क्यूँ नहीं है वाली भावना आती है। शादी मे अब रस्म रिवाज कम दिखावे की भावना ज्यादा हो रही है।कौन है जो दस आदमी लेकर मंदिर में जाकर शादी कर दे और उस बचाये हुए पैसे को वर वधू के भविष्य के लिये सुरक्षित कर दे। अगर लड़की के पिता शादी में ना दें कुछ तो लड़की को आजीवन ताना सुनना पड़ता है। अभी भी लोग बड़ी बड़ी बातें कर कंबल ओढ़कर घी पी रहें हैं । लड़कियाँ स्वावलंबी बनें एवं इस प्रथा का खुलकर विरोध करें तभी कुछ सुधरेगा ।२० लाख २२लाख देने वालें हैं तो आराम से वे ले रहें हैं और ईधर फेस बुक पर निकाल दिया कि दहेज रहित शादी करेंगे। लड़की वालों को उनका नाम उजागर करना चाहिये।Kiran Singh मैं आपसे सहमत हूँ किन्तु वैसे लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ती है शादी के बाद
Rakesh Nandan Dikhawa to puri zindagi hi hai? Baten chahhe ham jitni kar le, par jab action ka time aata hai to sari theory dhari rah jaati hai! Ham me see hai koi jo sachhai se kahe ki chahe meri beti bki shaadi na ho par main dahej nahi doonga! Bahut kambal odhkar ghee pite dekhen hain jiwan mein!Rahi baat shaadi mein taam jhaam ki to, isle do pahlu hain, ek bachhe khud air dusre rishtedaar! Shadi hamare samaj me sirf ek baar hoti hai, bachhe chahte hain wo yadgaar ho. Simple shaadi main kayi rishtedar chhut jayenge! Zindagi bhar tana marenge– beti ya beta ka shadi kiye puchha tak nahin! Sandra badhiya paanch gawah leke court marriage kijiye!
Mudda yeh hai, ki is problem ka practical samadhaan khojna hoga jis se saanp bhi mar jaye aur lathi bhi na tute!
Mudda yeh hai, ki is problem ka practical samadhaan khojna hoga jis se saanp bhi mar jaye aur lathi bhi na tute!
Rakesh Nandan Kuch auto correct ki wajah se trutiyan aa gayi hain sudhar ke padhe! Jaise Sandra ke badle Sabse!
Vidya Sharma Abhi 10 din pahle Mumbai me ek ladki ko uske pita dwara mahaj 18000 ka EMI n bhar pane ke karan Maar diya gya..ab sab band hain .Shadi ko abhi 20 January ko 1 saal hua aur 31 January ko Maar diya sasuraal walon ne.
Vidya Sharma लडकी के पिता ने शादी मे बाईक दी थी ..बिजनेस मे मंदी और मोदी के नोट बंदी से कुछ किस्त नही भर पाया वो।जिसके लिए उस लडकी को मार कर फाँसी दिखा दिया ससुराल वालों ने।
Rakesh Sharma विधा शर्मा मैम ये मरने मारने वाली बातों में केवल 10%दहेज वाली बात होती है बाकी मरने का कारण कुछ और होता है।केवल एक प्रतिशत मारी जाती बाकी 99प्रतिशत आत्म हत्या कर लेती।
Sangita Roy दहेज एक ऐसी कुरीति है जिसे जड़ से खत्म करने में बहुत वक्त लगेगा ।दहेज लेना और देना व्यक्ति का अपना सिद्धान्त भी होता है।बेटे के वक्त तो जिन्हें नहीं लेना है वो अपने सिद्धान्त पर अड़े रह सकते है।पर बेटी के वक्त मजबूर भी हो जाते है।शादी में दिखावे की बात तो जितना चादर हो उतना ही पाॅव फैलाए।इस मंच पर दहेज विरोधी बाते करना हमसब को अच्छा लगता है पर उसे व्यवहार में लाना बहुत कठिन है।










